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*मानव अधिकार विषय पर प्रशिक्षण सभी विभागों में दिया जाना चाहिए-शहाब हुसैन
  *वरिष्ठ संवाददाता-,गोरखपुर* गोरखपुर।रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स ट्रेनिंग सेंटर गोरखपुर में संचालित होने वाले पाठ्यक्रम "मैन्टेननेन्स ऑफ पब्लिक ऑर्डर -16वॉ बैच के प्रशिक्षुओं को "मानव अधिकार" विषय पर रेलवे सुरक्षा विशेष बल,ट्रेनिंग सेंटर,रजही कैम्प गोरखपुर के उप प्रधानाचार्य के पत्राचार निमंत्रण पर गेस्ट लेक्चरर बन उपस्थित हुए शहाब हुसैन ने "मानव अधिकारों "पर विस्तृत जानकारी दी।उन्होंने बताया कि "मानव अधिकार" वो अधिकार है जो मनुष्यों को जन्म से प्राप्त होता है। यदि एक ज़िम्मेदार सेवारत सभी कर्मचारियों या अधिकारियों को अपने सेवाकाल में मानवाधिकार व उसके हनन रोकथाम की जानकारी प्राप्त करलें ,तो वह एक कुशल नेतृत्व कर अपने कर्तव्यों अथवा कार्यों का सफल निर्वाहन कर सकता है। बतौर गेस्ट लेक्चरर आये शहाब हुसैन ने क्लासरूम में मौजूद सभी को बारी बारी से हर एक को मानवाधिकार हनन व बचाओ पर सवाल व जवाब दिया। सरलतापूर्वक सभी को मानवाधिकार पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार और मौलिक अधिकार में अंतर यह है की मौलिक अधिकार किसी खास देश के लिए होता है। जबकि मानव अधिकारों को पूरी दुनिया में मान्यता मिली हुई है मानव अधिकार हर व्यक्ति को मानव होने के नाते स्वाभाविक रूप से मिलने वाले मौलिक अधिकार हैं ।यह अधिकार हर व्यक्ति में निहित होते हैं चाहे उसकी राष्ट्रीयता, लिंग, जाति, रंग, धर्म ,भाषा या कोई और स्थिति कुछ भी हो।जब हम किसी चीज को व्यक्ति का अधिकार कहते हैं, तो हमारा मतलब होता है कि समाज पर उसका वैध अधिकार है कि वह उस चीज पर अपना अधिकार बनाए, चाहे वह कानून के बल पर हो या शिक्षा और राय के बल पर हो। मानवाधिकार घोषणा के जनक" रैने केसिन" को मन जाता है।जिनका जन्म 05 अक्टूबर 1887 के बेयोन सिटी ,फ्रांस में हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध में एक सैनिक के रूप में युवा वकील "रैने कैसिन"गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस अनुभव ने उन्हें जीवन भर के लिए प्रभावित किया। युद्ध के बीच के वर्षों में उन्होंने राष्ट्र संघ में फ्रांस का प्रतिनिधित्व किया, और निरस्तीकरण के लिए काम किया। 1920 के दशक में उन्होंने पूर्व शत्रुओं के बीच सुला करने की कोशिश की उन्होंने युद्ध के दिग्गजों के सम्मेलनों का समर्थन किया लेकिन जर्मनी में हिटलर के सत्ता पर कब्जा करने से ऐसे प्रयासों पर विराम लग गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र "रैने कैसिन" का क्षेत्र बन गया। वह संयुक्त राष्ट्र आयोग के दिमाग और प्रेरक शक्ति थे । जिसने 1948 के मानव अधिकारों की सार्वभौतिक घोषणा तैयार की। 10 दिसंबर 1948 को विश्व मानव अधिकार दिवस की घोषणा की गई और पूरा देश आज "विश्व मानव अधिकार दिवस" 10 दिसंबर को मानाता है। भारत मे सन 1993 में अपने स्थापना काल से ही राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने नागरिकों को मानव अधिकार के संरक्षण हेतु उल्लेखनीय कार्य किया है आयोग ने स्त्रियों ,बुजुर्गों ,बच्चों, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के प्रश्नों को गंभीरता से लेकर उनका भरपूर सम्मान देने, दिलाने का यत्न किया है। हमारे बीच में मान्यताएं और लोक के प्रति सम्मान में बढ़त हुई है। क्योंकि हमें मिलकर सर्वे भवंतु सुखिनः की ओर बढ़ते रहना है। अंत में उप प्रधानाचार्य रेलवे सुरक्षा विशेष बल के संजय कुमार ने मानव अधिकार पर प्रशिक्षण देने आए गेस्ट लेक्चरर शहाब हुसैन द्वारा दिये गए प्रशिक्षण की प्रसंशा की और इसी तरह सभी को आगे भी अपनी सेवाएं देने की अपेक्षा की।

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