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*कोंच में असत्य पर सत्य की विजय, रावण और मेघनाथ के पुतलो का हुआ दहन*

*दैनिक न्यूज वर्ल्ड ब्यूरो, जालौन– वीरेंद्र वर्मा / लालता प्रसाद*
 
उरई (जालौन) बुंदेलखंड जालौन जिले पूरे देश में दशहरा का पर्व आज बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा, लेकिन बुन्देलखंड के जालौन जिले के कोंच नगर में दशहरा आज अलग परम्परा के साथ मनाया गया। यहाँ पर बुराई के प्रतीक रावण और मेघनाद के पुतले जलाये गये। लेकिन कभी भी किसी ने राम-रावण और लक्ष्मण-मेघनाथ का इस तरह युद्ध नहीं देखा होगा। यहाँ पर राम-रावण और लक्ष्मण मेघनाद का युद्ध अलग ही तरीके से होता है। यहाँ पर रावण मेघनाथ के 40 फिट ऊचे पुतलों का युद्ध राम और लक्ष्मण के साथ सजीव होता है और अंत में बुराई के प्रतीक के रूप में रावण और मेघनाथ का संहार राम-लक्ष्मण द्वारा किया जाता है। यह युद्ध कोंच के ऐतिहासिक मैदान धनु तालाब पर होता है। और अंत मे रावण दहन किया गया। इस युद्ध को देखने के लिये 20 हजार से अधिक की भीड़ जुटती है। यह मैदानी रामलीला लिम्का बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।वैसे पूरे देश में राम-रावण और लक्ष्मण-मेघनाथ के पुतलों को एक बटन दबाकर जला दिया जाता है। लेकिन कोंच नगर में ऐसा देखने को नहीं मिलता है। यहाँ पर 172 वर्षों से चली आ रही परम्परा को कोंच के लोग अभी भी निर्वाहन कर रहे है। यहाँ पर राम-रावण और लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध परम्परागत तरीके से होता है। यहाँ पर राम और रावण का युद्ध सजीव होता है जिससे देखने के लिये दूर दराज के क्षेत्रों से लोग आते हैं। यहाँ रावण और मेघनाद के 40 फिट से ऊंचे पुतलो को बड़े-बड़े पहियों वाले रथ में बांधा जाता है और इन पुतलों
को पूरे मैदान में दौड़ाया जाता है। जिनसे युद्ध स्वयं भगवान राम और
उनके अनुज भ्राता लक्ष्मण करते हैं। इस युद्ध में कई बार मेघनाथ और रावण के पुतले कई बार जमीन में गिरते है जिसे देख वहाँ पर मौजूद लोग बहुत प्रसन्न होते हैं। इस युद्ध में बिलकुल वैसा ही होता है जैसा रामानन्द सागर की रामायण में दर्शाया गया है। इस युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति भी लगती है और हनुमान संजीवनी बूटी भी लाते हैं। जब रामऔर रावण का युद्ध होता है तो इन पुतलों को रस्सियों की सहायता से पूरे मैदान में दौड़ाया जाता है। इस परम्परा के दौरान ये पुतले कई बार नीचे जमीन में गिरते है जिन्हें लोग पुनः खडा करके मैदान में दौड़ाते हैं। रावण और मेघनाद के पुतलों को रथों में रखकर दौड़ाने के पीछे लोगों का तर्क है कि बुराई चाहे जितना भी भागे उसका अंत निश्चित ही होता है। इस तरह का रावण वध विगत 172 वर्षो से चला आ रहा है। इस राम-रावण युद्ध को देखने के लिये डीएम-एसपी और विधायक मूलचंद्र निरंजन समेत कई राजनैतिक हस्तियाँ भी मौजूद रही। वही स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा युद्ध उन्होने कही नहीं देखा यह पूरे देश में अनौखा राम-रावण और लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध है। राम- रावण युद्ध को देखते हुये प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतेजाम किये थे।

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