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कानपुर देहात के रनियां में इटावा हाईवे से सटे खानचंद्रपुर गांव में ऊंचे भवन गांव की संपन्नता का अहसास कराते हैं। गांव तक पक्की सड़क, फैक्ट्रियों का जाल, अच्छे स्कूल व विद्युत सबस्टेशन, सब कुछ है इस गांव में। मगर, इन सब पर भारी है यहां के लोगों को विरासत में मिली बीमारी। हवा में जहरीला धुआं व भूगर्भ से निकलता क्रोमियम युक्त पानी पीढि़यां तबाह कर रहा है। भले ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने छह फैक्ट्रियों को दोषी मानते हुए उन पर 280 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है लेकिन यहां के ग्रामीणों ने जो खोया उसे वापस नहीं किया जा सकता है।

फैक्ट्रियों से निकले केमिकलयुक्त पानी को रिवर्स बोरिग कर धरती के अंदर डाला जाता रहा है। साथ ही नाले में भी बहाया जाता रहा। इस तरह खेत तो बर्बाद हुए ही, लोगों की जिंदगी भी तबाह हो गई। 40 साल से अधिक समय से ग्रामीण चेहरे पर झुर्रियां, पीले और बदरंग दांत की समस्या से जूझ रहे हैं। फैक्ट्रियां लगने से पहले तक कुओं का पानी आज जैसा नहीं था। कुछ उद्यमियों ने ग्रामीणों को रोजगार का सब्जबाग दिखा आसपास गांवों में बीमारियों का ढेर लगा दिया।

हैंडपंपों का पीला पानी पीने से पैदा हो जाती खुजली

70 वर्षीय नन्हीं देवी कहती हैं, गांव का पानी इतना खराब है कि पीते ही शरीर में खुजली होने लगती है। शरीर पर दाने पड़ जाते हैं। 30 साल पहले तक पानी सही था, तब खेती भी ठीक होती थी। इसी तरह 50 वर्षीय उर्मिला बताती हैं, गांव में स्कूल, सड़क सब कुछ है लेकिन हैंडपंपों का पीला पानी श्राप बना हुआ है।

घर-घर मिल जाएंगे पीड़ित

45 वर्षीय उमा देवी के दोनों हाथों में दाने उभर आए हैं, खुजली भी होती है। बुधाना का भी यही हाल है। गांव की नन्हकी, सुशीला व रीता आदि के दांत पीले और खुरदुरे हो गए हैं। क्रोमियमयुक्त पानी पीने की विवशता

जमीन से मिले मुआवजे से ग्रामीणों ने सबमर्सिबल पंप लगवा कर मुसीबतें कम करने की कोशिश की। इसके बाद भी कुछ आबादी मजबूरीवश अभी भी क्रोमियमयुक्त पानी पीने को विवश है।

----------- क्रोमियमयुक्त पानी पीने से चर्म रोग, एलर्जी, डायरिया, किडनी, लीवर व कैंसर आदि बीमारी की आशंका बनी रहती है।

अबधेश कुमार जिला रिपोर्टर कानपुर महानगर की रिपोर्ट।
डॉ. वीपी सिंह, एसीएमओ कानपुर देहात

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