आखिर किसके संरक्षण में संचालित हो रही हैं शराब ठेकों पर अवैध कैंटीन
-आबकारी विभाग व स्थानीय पुलिस का कैंटीन संचालकों को मिल रहा है आशीर्वाद
-शासनादेश की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं शराब ठेके व कैंटीन के संचालक
-बिक्री के लाइसेंस पर परोसी जा रही है शराब
फतेहपुर जनपद के औग थाना क्षेत्र में संचालित हिंदी,अंग्रेजी शराब तथा बियर की दुकानों पर शासनादेश का भय संचालकों पर नहीं दिख रहा है न हीं कोई नियम कायदे खुलने व बंद होने का है शासन का सख्त आदेश है कि शराब ठेकों पर शराब बैठाकर नहीं पिलाई जाएगी केवल दुकाने बिक्री के लिए हैं जिन दुकानों पर बैठकर शराब पिलाई जाती हैं उनका लाइसेंस शासन खुद देता है लेकिन औग थाना क्षेत्र में ऐसी कोई दुकान नहीं है जिसका कोई लाइसेंस शराब पिलाने का हो केवल बिक्री के लिए ही दुकानें हैं लेकिन खुलेआम ठेका संचालक शासन के आदेश की धज्जियां उड़ा कर कैंटीन संचालित कर रहे हैं उक्त कैंटीनों पर बैठाकर शराब पीने की पूरी व्यवस्था कैंटीन संचालकों के द्वारा दी जाती है लेकिन इस तरफ नजर ना ही स्थानीय पुलिस की जाती है न ही आबकारी विभाग के अधिकारियों की सवाल ये उठता है कि जब शासन का आदेश है शराब बिक्री की दुकानों पर केवल शराब बिक्री की जाएगी उसके बाद भी कैंटीन किसके रहमों करम पर चल रही यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।
सुरक्षा के नाम पर पुलिस वसूलती है महिना
कैंटीन संचालकों से वसूली का रेट अलग अलग दुकानों के अनुसार तय है 2 दिन पूर्व एक वीडियो पर कैंटीन संचालक बड़े दावे के साथ कहता है कि हम तो महीने में पुलिस को पैसा देते हैं जिससे हमें कैंटीन चलाने में समस्या ना हो, यहां तक ठेकों से वसूली करने वाले एक सिपाही का नाम भी संचालक बड़े दावे के साथ बताता है।
धर्म वीर सिंह
-आबकारी विभाग व स्थानीय पुलिस का कैंटीन संचालकों को मिल रहा है आशीर्वाद
-शासनादेश की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं शराब ठेके व कैंटीन के संचालक
-बिक्री के लाइसेंस पर परोसी जा रही है शराब
फतेहपुर जनपद के औग थाना क्षेत्र में संचालित हिंदी,अंग्रेजी शराब तथा बियर की दुकानों पर शासनादेश का भय संचालकों पर नहीं दिख रहा है न हीं कोई नियम कायदे खुलने व बंद होने का है शासन का सख्त आदेश है कि शराब ठेकों पर शराब बैठाकर नहीं पिलाई जाएगी केवल दुकाने बिक्री के लिए हैं जिन दुकानों पर बैठकर शराब पिलाई जाती हैं उनका लाइसेंस शासन खुद देता है लेकिन औग थाना क्षेत्र में ऐसी कोई दुकान नहीं है जिसका कोई लाइसेंस शराब पिलाने का हो केवल बिक्री के लिए ही दुकानें हैं लेकिन खुलेआम ठेका संचालक शासन के आदेश की धज्जियां उड़ा कर कैंटीन संचालित कर रहे हैं उक्त कैंटीनों पर बैठाकर शराब पीने की पूरी व्यवस्था कैंटीन संचालकों के द्वारा दी जाती है लेकिन इस तरफ नजर ना ही स्थानीय पुलिस की जाती है न ही आबकारी विभाग के अधिकारियों की सवाल ये उठता है कि जब शासन का आदेश है शराब बिक्री की दुकानों पर केवल शराब बिक्री की जाएगी उसके बाद भी कैंटीन किसके रहमों करम पर चल रही यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।
सुरक्षा के नाम पर पुलिस वसूलती है महिना
कैंटीन संचालकों से वसूली का रेट अलग अलग दुकानों के अनुसार तय है 2 दिन पूर्व एक वीडियो पर कैंटीन संचालक बड़े दावे के साथ कहता है कि हम तो महीने में पुलिस को पैसा देते हैं जिससे हमें कैंटीन चलाने में समस्या ना हो, यहां तक ठेकों से वसूली करने वाले एक सिपाही का नाम भी संचालक बड़े दावे के साथ बताता है।
धर्म वीर सिंह

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