दर्रा समसपुर गांव का सुमित का आई,ए, एस हुआ में चयन ।
सांगीपुर छेत्र के दर्रा समसपुर गांव के सुमित सिंह पुत्र अखिलेश सिंह जो एम,पी, प्रान्त के इंदौर शहर में लगभग पचीस वर्ष पूर्व रोजी रोटी के लिए चले गए और एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे ।
वही सुमित का जन्म हुआ ।इनकी मां नीलम सिंह एक प्राइवेट विद्यालय में शिछक है।सुमित दो भाई एक बहन में सबसे छोटा है। ।बड़ी बहन पेसे से डॉ है ।और बड़ा भाई अमित सिंह भी प्राइवेट नौकरी करते है।
सुमित प्राथमिक से लेकर बीटेक तक कि पढ़ाई इंदौर में ही किया।
इसी बीच आर्थिक तंगी के कारण पूना शहर में प्राइवेट नौकरी करने लगा।
नौकरी में मन नही लगा ।और तीन साल बाद छोड़कर दिल्ली चला गया और वही से आई ,ए, एस, की कोचिंग व तैयारी करने लगा।दो बार असफल होने के बाद तीसरी बार आई,ए, एस, में 328वी रैंक के साथ सफलता मिली।जो परिजनों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी ।पैतृक गांव में चाचा सुरेश कुमार सिंह को सूचना मिलते ही पूरे छेत्र में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी ।प्रधान धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ लाल जी अशोक सिंह विवेक शुक्ल राजेन्द्र प्रताप सिंह आदि ने एक दूसरे का मुँह मीठा कराया
सांगीपुर छेत्र के दर्रा समसपुर गांव के सुमित सिंह पुत्र अखिलेश सिंह जो एम,पी, प्रान्त के इंदौर शहर में लगभग पचीस वर्ष पूर्व रोजी रोटी के लिए चले गए और एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे ।
वही सुमित का जन्म हुआ ।इनकी मां नीलम सिंह एक प्राइवेट विद्यालय में शिछक है।सुमित दो भाई एक बहन में सबसे छोटा है। ।बड़ी बहन पेसे से डॉ है ।और बड़ा भाई अमित सिंह भी प्राइवेट नौकरी करते है।
सुमित प्राथमिक से लेकर बीटेक तक कि पढ़ाई इंदौर में ही किया।
इसी बीच आर्थिक तंगी के कारण पूना शहर में प्राइवेट नौकरी करने लगा।
नौकरी में मन नही लगा ।और तीन साल बाद छोड़कर दिल्ली चला गया और वही से आई ,ए, एस, की कोचिंग व तैयारी करने लगा।दो बार असफल होने के बाद तीसरी बार आई,ए, एस, में 328वी रैंक के साथ सफलता मिली।जो परिजनों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी ।पैतृक गांव में चाचा सुरेश कुमार सिंह को सूचना मिलते ही पूरे छेत्र में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी ।प्रधान धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ लाल जी अशोक सिंह विवेक शुक्ल राजेन्द्र प्रताप सिंह आदि ने एक दूसरे का मुँह मीठा कराया

Badhai ho
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