प्रेस विज्ञप्ति
बच्चों के श्रवण दोश की षीघ्र पहचान के बाद उपचार/पुनर्वास हेतु हियरिंग एड एवं कोकिल्यर इम्पलांट एक बेहतर विकल्प है: डाॅ. रूचिका अग्रवाल, एम्स, गोरखपुर
“कोविड 19 के दौरान बच्चों के कान में होने वाले श्रवण संबंधी समस्याओं के लिए परामर्ष, रोकथाम एवं उपचार“ विशय पर सी.आर.सी. गोरखपुर ने एक दिवसीय आॅनलाइन वेविनार ई-परामर्ष श्रृंखला 38 का आयोजन किया। बतौर मुख्य वक्ता एम्स की ई एन टी विभाग की सहायक प्राध्यापक डाॅ. रूचिका अग्रवाल इस श्रृंखला को संबोधित कर रही थी। डाॅ. रूचिका अग्रवाल ने बहुत ही सरल प्रस्तुति द्वारा कान की बनावट, सुनने की प्रक्रिया तथा सुनने में आने वाली सामान्य बाधाओं के बारे में चर्चा किया। उनका कहना था कि षुरूआती दिनांे में ही अगर सावधानी रखी जाए तो सुनने की समस्या से बचा जा सकता है। यदि कान के पर्दे मंे छेद हो या इंफेक्षन हो तो ई एन टी डाक्टर से अवष्य मिलना चाहिए। घर पर इलाज करने से बचना चाहिए। इलाज के बाद भी यदि सुनने की समस्या हो जाती है तो व्यक्ति को पुनर्वास सेवाओं में हियरिंग एड एवं कोकिल्यर इम्पलांट परामर्ष हेतु सी.आर.सी. गोरखपुर से सम्पर्क करना चाहिए।
ये वेविनार सी.आर.सी. के निदेषक श्री रमेष कुमार पान्डेय जी की अध्यक्षता में हो रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन, कार्यक्रम समन्वयक सी.आर.सी. के भाशा और वाणी विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री रवि कुमार जी ने किया। सह-समन्वयक श्री अमित कुमार कच्छप ने प्रष्नोत्तर काल का संचालन किया। इस कार्यक्रम में आॅनलाइन माध्यम से 100 से ज्यादा लोगों ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट दिया गया।
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