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*राजशाही का प्रतीक है सेंगोल या राजदंड*

*वरिष्ठ संवाददाता-बीपीमिश्र*

गोरखपुर ,27 मई, भारत बचाओ संविधान बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक एवं विश्व शांति मिशन के अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने संसद में लोकसभा अध्यक्ष के पास सेंगोल स्थापित किए जाने को राज्य शाही एवं सामंतवाद का प्रतीक बताया उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार द्वारा सत्ता हस्तांतरण के समय नेहरू जी को सेंगोल हस्तांतरित किए जाने का कोई प्रमाण नहीं है। तमिलनाडु के शैव मठ द्वारा सम्मान स्वरूप नेहरु जी को सैंगोल सौंपा गया था जिसे राजदंड भी कहा जाता है और नेहरु जी ने उसे म्यूजियम में रखवा दिया था क्योंकि इस देश में राजशाही नहीं स्थापित है,यस सेक्युलर देश है। वर्तमान सरकार द्वारा नवनिर्मित संसद मे लोकसभा अध्यक्ष के पास सैंगोल स्थापित किया जाना सरासर संघीय ढांचे का अपमान है एवं भारत के संविधान की भावनाओं का अपमान है। सेंगोल या राजदंड राजा के हाथ में होता है, इस देश में सरकार संसद के द्वारा चलती है और संसद में दो सदन है। लोकसभा और राज्यसभा और दोनों के अलग-अलग अध्यक्ष और उपसभापति होते हैं। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष के पास सैंगोल रखा जाना कहां तक उचित है? दोनों सदनों का सर्वोच्च सर्वाधिकारी राष्ट्रपति महोदय होते हैं इस प्रकार देश का प्रथम नागरिक या अगर राजा ही माना जाए तो सेंगोल रखने का अधिकार राष्ट्रपति महोदय के पास है न कि लोकसभा अध्यक्ष के पास। भारतीय जनता पार्टी द्वारा जिस प्रकार से देश में अघोषित आपातकाल लगाया गया है ।और हर किसी की बात को अनसुनी कर दिया जा रहा है। तथा जिस प्रकार से हठधर्मिता का पालन किया जा रहा है ।यह प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं को राजा घोषित करने की प्रक्रिया ही प्रतीत होता है जो उचित नहीं लगता। इसलिए देश को संविधान प्रदत अधिकारों एवं निर्देशों के अंतर्गत संसदीय मर्यादा मे चलाये जाने की आवश्यकता है न कि किसी एक ब्यक्ति द्वारा जबरिया अपनी बात मनवाने के लिए जैसा कि पहले राजाओं द्वारा किया जाता था।अरुण कुमार श्रीवास्तव राष्ट्रीय संयोजक भारत बचाओ संविधान बचाओ आंदोलन एवं अध्यक्ष विश्व शांति मिशन।सूत्रों द्वारा प्राप्त खबर।

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