* राजगढ़ से जितेन्द्र वर्मा की ब्यूरो चीफ रिपोर्ट*
ब्यावरा.कोरोना के कहर के बीच आम बीमारी के उपचार को परेशान हो रहे जिला अस्पताल में जाने वाले मरीजों को अब कुछ राहत मिल सकती है। कुछ दिन पहले पॉजिटिव आकर नेगेटिव आई महिला की रिपोर्ट के बाद सील किए गए जिला अस्पताल को अब खोल दिया गया है। अब यहां व्यवस्थाएं यथावत हो गई हैं जिसके तहत आम दिनों जैसी डिलिवरी और सीजर होंगे।
हालांकि इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक शर्त रखी है कि जिला अस्पताल में सिर्फ खिलचीपुर, जीरापुर और अन्य आस-पास के केस ही देखे जाएंगे। इसके अलावा ब्यावरा से एक भी रेफर केस को नहीं आने दिया जाएगा। वैकल्पिक तौर पर ब्यावरा में की गई सीजर और डिलिवरी केसेस की व्यवस्था यथावत रहेगी। यानि ब्यावरा से जुड़े क्षेत्र के केस उधर रेफर नहीं कर पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि अस्पातल में पर्याप्त स्टॉफ है और संसाधनों की भी कोई दिक्कत नहीं है न ही विशेषज्ञ डॉक्टर्स की कमी। ऐसे में अपनी जिम्मेदारी से वे लोग सीजर करें और केस को राजगढ़ न आने दें। साथ ही दो अन्य महिला डॉक्टर्स को अटैच कर देने से भी काम कम हो गया है। ऐसे में डिलिवरी, सीजर और अन्य रूटीन उपचार में कोताही न बरती जाए। बता दें कि एक मात्र महिला के केस के सामने आने के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई थीं। महज रूटीन उपचार के अलावा जीरापुर, खुनजेर, छापीहेड़ा, खिलचीपुर, माचलपुर तक के मरीज ब्यावरा अस्पताल में रेफर किए जा रहे थे। जिससे न सिर्फ वहां काम बढ़ गया था बल्कि मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई थी। 108 या जननी से रेफर होने वाले मरीज लॉक डॉउन काल में लौट नहीं पा रहे थे। ऐसे में अब राजगढ़ जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं यथावत कर दी गई हैं।
कुछ दिन की इमरजेंसी में भी ब्यावरा से रेफर हुए केस
कुछ दिन की इमरजेंसी में ब्यावरा अस्पताल में होने वाले सीजर, डिविरी केस के दौरान भी जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई। जितने दिन केस भेजे गए उनमें से अधिकतर में रेफर करने की शिकायतें सामने आई। प्रसूताओं के परिजनों को मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ा या उन्हें भोपाल का रास्ता बता दिया गया, जिससे संक्रमिक और हॉट स्पॉट वाले भोपाल जाने में खासी दिक्कत उन्हें हुई। हालांकि कुछ सीजर सिविल अस्पताल में किए गए लेकिन अधिकतर में रेफर करने की शिकायतें मिलती रहीं।
जिला अस्पताल में आम दिनों में भी गंभीरता नहीं
भले ही ग्रीन से ऑरेंज में जाकर पुन: ग्रीन जोन में जिला आ गया हो और तमाम डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टॉफ की रिपोर्ट सामान्य आई हो लेकिन जिला अस्पताल की अनदेखी किसी से छिपी नहीं है। यहां आम दिनों में भी कैसे काम होता है, डॉक्टर्स कितनी जवाबदारी से काम करते हैं यह जग जाहिर है। यहां आने वाले हर डिलिवरी केस और अन्य रूटीन उपचार में खासी फजीहत मरीजों और उनके परिजनों की होती है, जिस पर सीएमएचओ से लेकर सिविल सर्जन तक किसी का कोई जोर नहीं चल पाता।
ब्यावरा में भी करना होंगे सीजर
जिला अस्पताल को खोल दिया है यहां भी सीजर, डिलिवरी होने लगी है। लेकिन ब्यावरा में भी सब यथावत रहेगा। लॉक डॉउन अवधि तक दो अतिरिक्त महिला डॉक्टर वहीं अटैच रहेंगी। बाकी सीजर और डिलिवरी वहीं करना होंगी, वहां से रेफर नहीं कर सकते।
-डॉ. के. के. श्रीवास्तव, सीएमएचओ, राजगढ़
ब्यावरा.कोरोना के कहर के बीच आम बीमारी के उपचार को परेशान हो रहे जिला अस्पताल में जाने वाले मरीजों को अब कुछ राहत मिल सकती है। कुछ दिन पहले पॉजिटिव आकर नेगेटिव आई महिला की रिपोर्ट के बाद सील किए गए जिला अस्पताल को अब खोल दिया गया है। अब यहां व्यवस्थाएं यथावत हो गई हैं जिसके तहत आम दिनों जैसी डिलिवरी और सीजर होंगे।
हालांकि इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक शर्त रखी है कि जिला अस्पताल में सिर्फ खिलचीपुर, जीरापुर और अन्य आस-पास के केस ही देखे जाएंगे। इसके अलावा ब्यावरा से एक भी रेफर केस को नहीं आने दिया जाएगा। वैकल्पिक तौर पर ब्यावरा में की गई सीजर और डिलिवरी केसेस की व्यवस्था यथावत रहेगी। यानि ब्यावरा से जुड़े क्षेत्र के केस उधर रेफर नहीं कर पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि अस्पातल में पर्याप्त स्टॉफ है और संसाधनों की भी कोई दिक्कत नहीं है न ही विशेषज्ञ डॉक्टर्स की कमी। ऐसे में अपनी जिम्मेदारी से वे लोग सीजर करें और केस को राजगढ़ न आने दें। साथ ही दो अन्य महिला डॉक्टर्स को अटैच कर देने से भी काम कम हो गया है। ऐसे में डिलिवरी, सीजर और अन्य रूटीन उपचार में कोताही न बरती जाए। बता दें कि एक मात्र महिला के केस के सामने आने के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई थीं। महज रूटीन उपचार के अलावा जीरापुर, खुनजेर, छापीहेड़ा, खिलचीपुर, माचलपुर तक के मरीज ब्यावरा अस्पताल में रेफर किए जा रहे थे। जिससे न सिर्फ वहां काम बढ़ गया था बल्कि मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई थी। 108 या जननी से रेफर होने वाले मरीज लॉक डॉउन काल में लौट नहीं पा रहे थे। ऐसे में अब राजगढ़ जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं यथावत कर दी गई हैं।
कुछ दिन की इमरजेंसी में भी ब्यावरा से रेफर हुए केस
कुछ दिन की इमरजेंसी में ब्यावरा अस्पताल में होने वाले सीजर, डिविरी केस के दौरान भी जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई। जितने दिन केस भेजे गए उनमें से अधिकतर में रेफर करने की शिकायतें सामने आई। प्रसूताओं के परिजनों को मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ा या उन्हें भोपाल का रास्ता बता दिया गया, जिससे संक्रमिक और हॉट स्पॉट वाले भोपाल जाने में खासी दिक्कत उन्हें हुई। हालांकि कुछ सीजर सिविल अस्पताल में किए गए लेकिन अधिकतर में रेफर करने की शिकायतें मिलती रहीं।
जिला अस्पताल में आम दिनों में भी गंभीरता नहीं
भले ही ग्रीन से ऑरेंज में जाकर पुन: ग्रीन जोन में जिला आ गया हो और तमाम डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टॉफ की रिपोर्ट सामान्य आई हो लेकिन जिला अस्पताल की अनदेखी किसी से छिपी नहीं है। यहां आम दिनों में भी कैसे काम होता है, डॉक्टर्स कितनी जवाबदारी से काम करते हैं यह जग जाहिर है। यहां आने वाले हर डिलिवरी केस और अन्य रूटीन उपचार में खासी फजीहत मरीजों और उनके परिजनों की होती है, जिस पर सीएमएचओ से लेकर सिविल सर्जन तक किसी का कोई जोर नहीं चल पाता।
ब्यावरा में भी करना होंगे सीजर
जिला अस्पताल को खोल दिया है यहां भी सीजर, डिलिवरी होने लगी है। लेकिन ब्यावरा में भी सब यथावत रहेगा। लॉक डॉउन अवधि तक दो अतिरिक्त महिला डॉक्टर वहीं अटैच रहेंगी। बाकी सीजर और डिलिवरी वहीं करना होंगी, वहां से रेफर नहीं कर सकते।
-डॉ. के. के. श्रीवास्तव, सीएमएचओ, राजगढ़

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