Skip to main content

DlightNews

ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय शांतिधाम, 36-37, दयाल बाग द्वारा महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में गांव भड़ोग में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 
अंबाला (दीपक वोहरा)महाशिवरात्रि के अवसर पर गाँव भड़ोंग में कार्यक्रम आयोजित किया गया ।जिसमें राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी शैली दीदी ने कहा की भारत देश में ही स्वयं परमपिता परमात्मा अवतरित होकर अनेक अधर्म का विनाश कर, एक सतधर्म अर्थात्‌ आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करते हैं। स्वयं परमात्मा की अवतरण होने के कारण ही भारत इतना उच्च है। उन्होंने भारत की अनोखी व अनसुनी 5000 वर्ष की कहानी सुनाते हुए कहा कि एक समय था जब हमारा भारत देश सुख-समृद्धि से संपन्न था। चारों ओर खुशहाली और निःस्वार्थ प्रेम का वातावरण था। ऐसा नि:स्वार्थ प्रेम जो शेर व बकरी जैसे प्राणी भी इकट्ठे नदी पर जल पीते थे। यहां रहने वाले हर एक मनुष्य दैवी गुणों से संपन्न, संपूर्ण निर्विकारी व 16 कला संपूर्ण थे। यहां रहने वाले मनुष्य देवी व देवता कहलाते थे, जिनकी आयु 150 वर्ष की होती थी और 8 जन्म होते थे। इन देवताओं को “सुर्यवंशी कहा जाता था। इस युग की आयु थी 1250 वर्ष थी।
ये थी सतयुग की बात। लेकिन सृष्टि का नियम है कि कोई भी चीज़ सदा नई नहीं रहती है, वह पुरानी ज़रूर होती है, चाहे मकान हो या दुनिया। हमारा भारत देश भी समय के साथ थोड़ा पुराना होता गया अर्थात्‌ सतयुग से आया त्रेता युग। इस युग में आत्माओं की 2 कला कम हो 14 कला रह गई। उनकी आयु भी घटकर 100 वर्ष हो गयी। यहां 12 जन्म हुए और देवताएं सुर्यवंशी से बदलकर चंद्रवंशी कहलाए। इस युग की आयु भी 1250 वर्ष थी। इन्हीं दो युगों को एक साथ “स्वर्ग' कहा जाता था।
ये दोनों ही युग अथाह सुख-शांति व समृद्धि से भरपूर थे, यहां दुःखी होना या रोना आदि नहीं था, क्योंकि यहां मृत्यु शब्द नहीं था और किसी भी प्रकार का विकार नहीं था। प्रत्येक को अपने स्व स्वरूप का अर्थात्‌ मैं एक आत्मा हूं - यह भान था। 2500 वर्ष पूर्ण हुए, तब आया
द्वापर युग। जब द्वापर युग आया तब आत्मा की क्वालिटी 16 कला से घटकर 8 कला रह गई। मैं आत्मा हूं - यह भूल सभी अपने को देह समझने लगे, जिस कारण आत्मा के अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी पांच विकारों का प्रवेश हुआ। देह अभिमान के कारण वे विभिन्‍न दुःखों व रोगों से ग्रस्त होने लगे और तब सर्वप्रथम आत्माओं ने भगवान को याद किया, जो आत्माओं के परमपिता हैं। पहले-पहले तो केवल शिव के मंदिर बने और शिव की ही पूजा की गयी, जिसे अव्यभिचारी भक्ति कहते हैं। किंतु बाद में वे अपने ही पूर्वज देवता स्वरूप के बड़े-बड़े मंदिर बनाकर पूजा करने लगे, फिर प्रकृति और मनुष्यों को भी पूजने लगे। इस तरह धीरे-धीरे भक्ति भी अव्यभिचारी से व्यभिचारी हो गयी। हमारा भारत जो एक धर्म पर टिका हुआ था, वो अनेक धर्म में बंट गया। विश्व में जितने भी धर्मशास्तर, उपनिषद्‌, बाइबल वा कुरान हैं, सब इसी द्वापर युग में लिखे गए हैं।
द्वापर में 21 जन्म हुए जिसमें आयु और कम हो गयी। जितना-जितना जन्म बढ़ता गया, उतनी-उतनी आयु घटती रही और फिर हम पहुंचे कलियुग में, जहां 42 जन्म है। नीचे उतरते उतरते आत्मा की कला भी समाप्त हो शून्य कला रह गई। साथ ही इंसान के अंदर इंसानियत समाप्त हो गई। जो दैवी गुणों से संपन्न देवता थे, वे ही आसुरी अवगुणों के प्रवेश के कारण असुर जैसे बन गए। ये थी हम भारतवासियों के 84 जन्म की अनसुनी कहानी, जो एक सीढ़ी की तरह है।
कार्यक्रम के दौरान शिव ध्वजारोहण किया गया व गांव के सरपंच मंगत राम जी को ईश्वरीय सौगात से सम्मानित किया।

Comments

Popular posts from this blog

DlightNews

थाना खुदागंज के ग्राम पंचायत जलालपुर में संदिग्ध परिस्थियों के चलते किया गया सरदार रंजीत सिंह उर्फ राजा का मर्डर पुलिस टीम कर रही है जांच -------------+----------------------------------------------------------------  थाना खुदागंज के ग्राम पंचायत जलालपुर तहसील तिलहर जिला शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश में कल रात्रि लगभाग 12 से 2:00 बजे बजे के बीच सरदार रंजीत सिंह उर्फ़ राजा का सन्दिग्घ परिस्थितियों में अज्ञात लोगों ने लोहे की राडे तथा लाठि दंदों से पीट कर हत्या कर दी गई राजा बहुत ही सरल स्वभाव का बा मिलनसर लड़का था उसके परिवार वालों से बातचीत करने के बाद बताया गया कि उसकी किसी से भी कोई दुश्मनी नहीं थी और न ही किसी से बुरी थी लेकिन फिर भी किसी ने उसके साथ बहुत ही निंदनीय व्यवहार किया हमारा बेटा हम सबको छोड़ कर चला गया है रंजीत सिंह की बीवी बच्चों का भी रो रोकर बुरा हाल है ये घाटना हर किसी के दिल को झकझोर रही है रिपोर्ट लिखने तक घटना का खुलासा थाना खुदागंज पुलिस नहीं कर सकी पुछने पर SHO खुदागंज सत्य प्रकाश के द्वारा बताया गया कि घाटना का जल्द से जल्द खुलासा किया जाएगा हमारा पूर...

DlightNews

 मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक संपन्न, 27 सितंबर को दिल्ली में होगा ऐतिहासिक राष्ट्रीय महासम्मेलन नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली के हरियाणा भवन में सोमवार को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बड़े उत्साह और एकजुटता के साथ संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से राष्ट्रीय संयोजक, राष्ट्रीय सह-संयोजक, क्षेत्रीय संयोजक और प्रकोष्ठ संयोजकों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार जी ने की, जिनके मार्गदर्शन में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 27 सितंबर को दिल्ली में भव्य राष्ट्रीय महासम्मेलन: बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 27 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में एक भव्य राष्ट्रीय महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस महासम्मेलन में देशभर से लाखों की संख्या में कार्यकर्ता एकत्र होंगे, जो सामाजिक एकता, भाईचारा और राष्ट्रीय विकास के लिए मं...

DlightNews

शाह समाज महासम्मेलन के पदाधिकारीयों आज राजधानी लखनऊ में बैठक अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री से करेंगे मुलाकात संक्षेप: Lucknow News - लखनऊ में उत्तर प्रदेश शाह अल्वी समाज की आगामी महासम्मेलन की तैयारी में पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री से मुलाकात करने का निर्णय लिया और प्रशासन से सहयोग की मांग की। बैठक विक्रमादित्य मार्ग स्थित लखनऊ मंत्री दानिश आजाद जी के आवास पर हुई। इस दौरान पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश भाषा विभाग के पूर्व अध्यक्ष श्री तुरज जैदी से भी औपचारिक मुलाकात की इस संबंध में शाह समाज के पदाधिकारियों ने मंत्री दानिश आजाद अंसारी जी से मुलाकात करने की बात कही। राष्ट्रीय सह संयोजक जियारत अली शाह मलंग ने कहा कि हमारा मकसद है कि बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के लोंगो को एक मंच पर लाया जाए बैठक में प्रदेश अध्यक्ष शोहरत अली शाह मलंग,राष्ट्रीय सह संयोजक जियारत अली शाह मलंग राष्ट्रीय संयोजक ताहिर शाह, मारूफ,दानिश आदि रहे।