बस्ती का सिफारिश वाला मेडिकल कॉलेज
यूपी में अगर बेरोजगारों को नौकरी चाहिए तो मोदी और योगी के नेता की सिफारिश लेकर आइए, जी है हमारे संवादाता के पास ऐसे नेताओं के लेटर पैड हाथ लगे है जो बस्ती मेडिकल कॉलेज में भर्ती के लिए अपने लोगो की एक लिस्ट बनाकर भेज रहे, अब इन नेताओं की पोल खुल कर आमने आ गयी है, जीरो टॉलरेन्स और भ्रस्टाचार मुक्त सरकार की बात करने का दावा फिलहाल पूरी तरह से खोखला साबित हो रहा है, बस्ती मेडिकल कॉलेज में आउट सोर्सिंग के जरिये 178 पदों पर भर्ती होनी है लेकिन इस भर्ती प्रक्रिया में बस्ती के सांसद, विधायक और जिला अध्यक्ष अपने लेटर पैड पर अपने चहेतों का नाम लिख कर भेज रहे ताकि उनके लोगो की भर्ती की जाए, अब नेताओ की सिफारिश से जब नौकरियां मिलेंगी तो जाहिर सी बात है कि प्रतिभावान छात्र पीछे रह जाएंगे, इतना ही नही आउट सोर्सिंग कंपनी प्रति कंडीडेट से फॉर्म भरने के लिए 590 रुपए ऑनलाइन वसूल लिए लेकिन आजीविका मिशन में रजिस्ट्रेशन फीस केवल 200 रुपए है, ऐसे में 16 हज़ार बेरोजगारों ने अपना पंजीकरण कराया और 94 लाख रुपए वसूले, जिसमे से केवल आजीविका मिशन में 26 लाख जमा किये बाकी कंपनी डकार गयी।
बस्ती के मेडिकल कालेज में सांसद, दो विधायक और भाजपा के जिलाध्यक्ष के अपने लोगों का कब्जा होने जा रहा है। इन ‘माननीयों’ ने अपने लोगों को नौकरी दिलाने के लिए लेटर पैड पर सिफारिष के साथ 117 लोगों की लिस्ट जारी की है। अगर मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी ने ‘माननीयों’ की सिफारिष को मान लिया तो यह ‘माननीयों’ के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। जिन माननीयों ने सूची दी है, उनमें सांसद हरीष द्विवेदी ने 70, हर्रैया के विधायक अजय सिंह ने 28, भाजपा जिलाध्यक्ष पवन कसौधन ने 10 और सदर विधायक दयाराम चौधरी ने नौ नामों की सूची जारी की है। सांसद को छोड़कर अन्य ‘माननीयों’ का लेटर पैड पर हस्ताक्षर हैं। मेडिकल कालेज में इन दिनों आउट सोर्सिंग के जरिए 175 लोगों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। सभी ‘माननीय’ की यह अपेक्षा है कि उनके सिफारिष को प्राथमिकता दी जाए। सूची को मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी इंटेलिजेंस सिक्योरिटी सर्विस को दे दी गई है। ‘माननीयो’ के द्वारा जो सूची दी गई है, उसके बारे में कहा जा रहा है कि उनमें अधिकतर लोगों का आन लाइन पंजीकरण ही नहीं हैं। जबकि मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी के यहां पंजीकरण होना अनिवार्य है।
पिछले चार-पांच दिन से मेडिकल कालेज में आउट सोर्सिंग के जरिए महानिदेषक चिकित्सा षिक्षा एवं प्रषिक्षण लखनऊ द्वारा नामित दिल्ली की एक एजेंसी भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने में लगी हुई हैं। साक्षात्कार के पहले दिन से ही एजेंसी के लोगों द्वारा नौकरी पाने की आस लिए बेरोजगारों से दो से ढा़ई लाख रुपये की वसूली करने का आरोप लग रहा है। धन देने वालों में अधिकतर वे लोग हैं जिन्होंने पत्नी और माता के गहने बेचकर या गिरवी रखकर दिए है। कईयों ने भारी ब्याज पर कर्ज लेकर धन दिया। धन लेने की षिकायत भी प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं षिक्षा सहित अन्य अधिकारियों से एमएलसी देवेंद्र प्रताप के प्रतिनिधि हरीष सिंह कर चुके है। इस मामले में मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल स्पष्ट कह चुके हैं कि धन की वसूली और चयन के मामले में मेडिकल कालेज के किसी भी कर्मचारी की कोई भी भूमिका नहीं हैं। बताया कि सारे अधिकार मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी को डीजी कार्यालय की ओर से दी गई है। कहते हैं कि अगर वह खुद किसी का चयन करना चाहे तो नहीं कर सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि धन की वसूली सिर्फ बस्ती में ही नहीं बल्कि लखनऊ से भी एजेंसी के लोग कर रहे है।
यूपी में अगर बेरोजगारों को नौकरी चाहिए तो मोदी और योगी के नेता की सिफारिश लेकर आइए, जी है हमारे संवादाता के पास ऐसे नेताओं के लेटर पैड हाथ लगे है जो बस्ती मेडिकल कॉलेज में भर्ती के लिए अपने लोगो की एक लिस्ट बनाकर भेज रहे, अब इन नेताओं की पोल खुल कर आमने आ गयी है, जीरो टॉलरेन्स और भ्रस्टाचार मुक्त सरकार की बात करने का दावा फिलहाल पूरी तरह से खोखला साबित हो रहा है, बस्ती मेडिकल कॉलेज में आउट सोर्सिंग के जरिये 178 पदों पर भर्ती होनी है लेकिन इस भर्ती प्रक्रिया में बस्ती के सांसद, विधायक और जिला अध्यक्ष अपने लेटर पैड पर अपने चहेतों का नाम लिख कर भेज रहे ताकि उनके लोगो की भर्ती की जाए, अब नेताओ की सिफारिश से जब नौकरियां मिलेंगी तो जाहिर सी बात है कि प्रतिभावान छात्र पीछे रह जाएंगे, इतना ही नही आउट सोर्सिंग कंपनी प्रति कंडीडेट से फॉर्म भरने के लिए 590 रुपए ऑनलाइन वसूल लिए लेकिन आजीविका मिशन में रजिस्ट्रेशन फीस केवल 200 रुपए है, ऐसे में 16 हज़ार बेरोजगारों ने अपना पंजीकरण कराया और 94 लाख रुपए वसूले, जिसमे से केवल आजीविका मिशन में 26 लाख जमा किये बाकी कंपनी डकार गयी।
बस्ती के मेडिकल कालेज में सांसद, दो विधायक और भाजपा के जिलाध्यक्ष के अपने लोगों का कब्जा होने जा रहा है। इन ‘माननीयों’ ने अपने लोगों को नौकरी दिलाने के लिए लेटर पैड पर सिफारिष के साथ 117 लोगों की लिस्ट जारी की है। अगर मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी ने ‘माननीयों’ की सिफारिष को मान लिया तो यह ‘माननीयों’ के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। जिन माननीयों ने सूची दी है, उनमें सांसद हरीष द्विवेदी ने 70, हर्रैया के विधायक अजय सिंह ने 28, भाजपा जिलाध्यक्ष पवन कसौधन ने 10 और सदर विधायक दयाराम चौधरी ने नौ नामों की सूची जारी की है। सांसद को छोड़कर अन्य ‘माननीयों’ का लेटर पैड पर हस्ताक्षर हैं। मेडिकल कालेज में इन दिनों आउट सोर्सिंग के जरिए 175 लोगों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। सभी ‘माननीय’ की यह अपेक्षा है कि उनके सिफारिष को प्राथमिकता दी जाए। सूची को मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी इंटेलिजेंस सिक्योरिटी सर्विस को दे दी गई है। ‘माननीयो’ के द्वारा जो सूची दी गई है, उसके बारे में कहा जा रहा है कि उनमें अधिकतर लोगों का आन लाइन पंजीकरण ही नहीं हैं। जबकि मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी के यहां पंजीकरण होना अनिवार्य है।
पिछले चार-पांच दिन से मेडिकल कालेज में आउट सोर्सिंग के जरिए महानिदेषक चिकित्सा षिक्षा एवं प्रषिक्षण लखनऊ द्वारा नामित दिल्ली की एक एजेंसी भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने में लगी हुई हैं। साक्षात्कार के पहले दिन से ही एजेंसी के लोगों द्वारा नौकरी पाने की आस लिए बेरोजगारों से दो से ढा़ई लाख रुपये की वसूली करने का आरोप लग रहा है। धन देने वालों में अधिकतर वे लोग हैं जिन्होंने पत्नी और माता के गहने बेचकर या गिरवी रखकर दिए है। कईयों ने भारी ब्याज पर कर्ज लेकर धन दिया। धन लेने की षिकायत भी प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं षिक्षा सहित अन्य अधिकारियों से एमएलसी देवेंद्र प्रताप के प्रतिनिधि हरीष सिंह कर चुके है। इस मामले में मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल स्पष्ट कह चुके हैं कि धन की वसूली और चयन के मामले में मेडिकल कालेज के किसी भी कर्मचारी की कोई भी भूमिका नहीं हैं। बताया कि सारे अधिकार मानव की आपूर्ति करने वाली एजेंसी को डीजी कार्यालय की ओर से दी गई है। कहते हैं कि अगर वह खुद किसी का चयन करना चाहे तो नहीं कर सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि धन की वसूली सिर्फ बस्ती में ही नहीं बल्कि लखनऊ से भी एजेंसी के लोग कर रहे है।
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