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*सीआरसी गोरखपुर में तीन दिवसीय सी आर ई कार्यक्रम के साथ-साथ जन-जागरूकता के दो अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।*
*रिपोर्टर-बी.पी.मिश्र,गोरखपुर*
गोरखपुर 29 नवम्बर 2021(27 से 29 नवंबर) के बीच में दिव्यांगजन अधिकार स्थिति और नीतियां विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सीआर ई कार्यक्रम का समापन आज हो गया। इस कार्यक्रम में पूरे भारतवर्ष से 100 पुनर्वास व्यवसायिकों ने  प्रतिभाग किया। आज के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के निदेशक डॉ हिमांग्शु दास ने भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा संचालित पाठ्यक्रम के महत्व तथा उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। अपनी बात कहते हुए डॉ दास ने कहा कि भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए तथा पाठ्यक्रमों को दिव्यांगजन के अनुकूल बनाने के साथ-साथ रोजगार परक भी बनाना चाहिए। आज विशेषज्ञों को क्रॉस डिसेबिलिटी एप्रोच के साथ काम करना चाहिए जिससे कि वे एक दिव्यांगता के साथ-साथ अन्य दिव्यांगता के छात्रों को भी डील कर सकें।समापन समारोह में सक्षम के श्री कमला कांत पांडे एवं डॉ जयशंकर प्रसाद पांडे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। * एक अन्य कार्यक्रम में रजही स्थित रेलवे विशेष सुरक्षा बल के सभागार भवन में जन-जागरूकता  कार्यक्रम का आयोजन किया गया* जिसमें दिव्यांगता के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण तथा मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इसके अलावा ई-परामर्श श्रृंखला की 150 वीं कड़ी में नवजात शिशु का श्रवण परीक्षण तथा वर्तमान परिदृश्य विषय पर ऑनलाइन वेबीनार का भी आयोजन किया गया। जिसमें नवजात शिशु के श्रवण परीक्षण के महत्व के बारे में बताया गया कि यदि समय से बच्चों के सुनाई की जांच हो जाए तो उन्हें भाषा और वाणी से उत्पन्न होने वाली दिव्यांगता से बचाया जा सकता है।आज के कार्यक्रम में कार्यक्रम समन्वयक श्री रवि कुमार, नीरज मधुकर, श्री राजेश कुमार सहित सीआरसी गोरखपुर के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।

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