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भारत की संस्कृति सबसे समृद्ध: शिव प्रताप


गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब द्वारा आयोजित दो दिवसीय मंथन कार्यक्रम का उद्घाटन

गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की ओर से दो दिवसीय मंथन कार्यक्रम का आयोजन नेपाल क्लब में आयोजित किया गया। उद्धघाटन सत्र में आधुनिक विश्व मे सनातन संस्कृति और राष्ट्रवाद विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पूर्व वित्त राज्यमंत्री व राज्यसभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि भारत की संस्कृति सबसे समृद्ध है। शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि इतिहासकारों ने भारतीय संस्कृति को भुला दिया था। भारतीय संस्कृति विश्वव्यापी है। आज भारतीय संस्कृति का पूरा विश्व लोहा मान रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता से जुड़े कुछ इतिहासकारों ने भारतीय संस्कृति को विदेशियों से ज्यादा नुकसान पहुँचाया, लेकिन अब समय बदल गया है। परिस्थितियां बदल रही हैं पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है। भारत की सभ्यता और संस्कृति का व्यापक असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है।
मुख्यवक्ता के रूप में बोलते हुए भारतीय इतिहास लेखन के सचिव डॉ बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ही राम और भरत के उदाहरण मिलते हैं। आज भी श्रीलंका की पहचान रावण से नहीं बल्कि राम से होती है। वहां के लोग राम को मानते हैं। भारतीय संस्कृति में समय की बहुत महत्ता  है। क्योंकि यहां समय की गणना पल से होती है। भारत ने वैदिक काल से विश्व को बहुत कुछ दिया है आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी संगोष्ठी आत्मश्लाघा के लिए नहीं होती है बल्कि किसी मामले को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए होती हैं। किसी भी समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब उस पर समाधान के लिए संवाद होना जरूरी हो। समस्या का समाधान तभी होगा जब आपस में बातचीत होती रहे, मंथन भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मंथन का उद्देश्य हमेशा ही अमृत प्राप्त करने के लिए होता है। आज विश्व के 3 दर्जन से अधिक देशों में भारतीय संस्कृति का प्रभाव साफ दिखाई देता है चाहे वह अमेरिका हो लंदन हो रूस या फिर कंबोडिया वियतनाम समेत कई देशों में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट देखने को मिलती है। आयुर्वेद भारत की देन है और वह आज एक बार फिर दुनिया में स्थापित हो रहा है। पांडेय ने वामपंथी विचारधारा को आड़े हाथों लिया। कहा कि यह लोग कभी भी भारतीय सभ्यता और संस्कृति को अपना नहीं पाए और सृजन की बात नहीं करते हैं बल्कि समाज में जहर घोलने का काम करते हैं। कहा कि आज पूरा विश्व इस बात को महसूस कर रहा है कि संयुक्त परिवार जरूरी है ताकि आपसी एकता कायम रह सके। बालमुकुंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति चिर पुरातन और नित्य नूतन है।

विशिष्ट अतिथि दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ रत्नेश त्रिपाठी ने कहा कि समाज में परिणाम पाने के लिए संवाद जरूरी है। हम आधुनिक हो जाएं तो वैदिक हो जाएंगे भारत की संस्कृति हमेशा समृद्ध रही है। आज के समय में हमें अपनी संस्कृति के बारे में जानना जरूरी है हमें किसी भी विदेशी विचारक की आवश्यकता नहीं है हमारे देश में बहुत सारे विचारक हैं जो भारतीय संस्कृति को बेहतर जानते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद ने अपनी बात पूजी और पूंजीवाद से शुरू की। कहा कि दुनिया पूंजीवाद में फंसती जा रही है हर पश्चिमी देश में पूंजीवाद हावी है, यहां तक की उनके व्यापार और परिवार में भी पूजी हाबी है। उन्होंने कई देशों के राष्ट्र प्रमुखों का उदाहरण भी दिया। कहा कि पूंजीवाद के दुष्परिणाम से बचने के लिए भारतीय संस्कृति ही एकमात्र जरिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। यह बहुत ही व्यापक और संवेदनशील विषय है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने पर किसी भी ताकत का समय रहते ही फन कुचल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यह पहचान करना जरूरी है कि राष्ट्र हित में कौन काम करता है और कौन राष्ट्रीय हितों के खिलाफ। उसके हिसाब से हमें उस पर अंकुश लगाना चाहिए। चाइना और पाकिस्तान भारत के लिए नई चुनौती के रूप में उभरे हैं हमें उनका सामना करने के लिए अपने आप को और बेहतर बनाना होगा। प्रेस क्लब के अध्यक्ष मार्कण्डेय त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया तथा संचालन संजय तिवारी ने किया। 
मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिन्ह  प्रेस क्लब पदाधिकारियों अध्यक्ष मार्कण्डेय मणि उपाध्यक्ष अतुल तिवारी महामंत्री मनोज यादव संयुक्त मंत्री आशीष भट्ट पुस्तकालय मंत्री निखिलेश कोषाध्यक्ष बैजू गुप्ता, दीपक त्रिपाठी अंगद प्रजापति संजय कुमार ने दिया। 
इस अवसर पर कार्यक्रम में पूर्व महापौर डॉ सत्या पांडेय, डॉ शैलेंद्र मणि त्रिपाठी बागीस धर द्विवेदी, गिरीश पांडेय, अशोक चौधरी बच्चा पांडे संजय सिंह धर्मेंद्र सिंह अजय सिंह ओंकार द्विवेदी, अरविंद राय, आशीष शुक्ला संगम दुबे, प्रेम पराया, राम कृष्ण शरण मणि त्रिपाठी "मणि जी" बृजेन्द्र सिंह, विजय मोदनवाल।

प्रथम सत्र में पूर्व वित्त राज्य मंत्री राज्य सभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ल ने स्वर्गीय डॉक्टर राजीव केतन की स्मृति  में लगाए गए फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और उसका अवलोकन किया।
इसी क्रम में कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मीडिया और आज का समय विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो संजय द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों का चैलेंज बढ़ गया है रीजनल लैंग्वेज तेजी से बढ़ रहे हैं जिससे पूरी दुनिया बदल रही है और लोग तकनीकी सूचना अपना रहे हैं वे भी लोग पत्रकारिता के तहत आ रहे हैं पढ़ने की आदतें बदल रही हैं जो डिजिटल रूप में है अखबार टीवी अर्थात एक छत के नीचे कई तरह की दुनिया बन रही है डिजिटल सत्याग्रह शुरू करने की जरूरत है।
 मुख्य वक्ता आई टीवी नेटवर्क के सीईओ अजय शुक्ला ने  अपने संबोधन में कहा कि नई शैली बुराई नहीं है बल्कि पुरानी शैली को जीवंत रखना भी जरूरी है पत्रकारिता प्रोडक्ट के रूप में तैयार किया जा रहा है पत्रकारिता हमारी जरूरत है सच को देखें तथा पत्रकारिता की आत्मा को जीवित रखना जरूरी है आज की मीडिया विश्वसनीयता है देश मानवता कामगार की समस्या को देखना और दिखाना जरूरी है मुख्य वक्ता रविन्द्र सिन्हा ने कहा कि मीडिया एक समग्र तंत्र है 21वी शताब्दी वेव इंटरनेट का माध्यम है पत्रकारिता सूचना तकनीकी पर आधारित है जो पारंपरिक तौर पर चुनौती दे रहे हैं सोशल मीडिया का सहारा ली जा रही है आज हर नागरिक पत्रकार की भूमिका में आ गया है देश और समाज को हित में रखते हुए पत्रकारिता करें अध्यक्षता कर रहे।
 लेखक, स्तम्भकार, वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता बड़ा चीज क्या है 19वीं सदी में पत्रकारिता कुछ और थी स्तंभ के रूप में था पत्रकारिता वैज्ञानिक पद्धति की तरफ से पत्रकारिता के माध्यम से बढ़ने लगे हैं नया दौर डिजिटल का दौर है गेटकीपर पत्रकारिता से गायब हो गया है क्योंकि जो स्तंभ थे वे टूट चुके हैं जब तक डिजिटल को डिजिटल नहीं समझेंगे तब तक पत्रकारिता बची रहे समाज शाकम देश  बचा के रहे  सभी पत्रकारिता बची रहेगी।
इस अवसर पर प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।
 इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार सुजीत पांडे, बागीस धर द्विवेदी, बच्चा पांडे, गिरीश पांडे, राघवेंद्र दुबे, उदय प्रकाश पांडेय, धर्मेन्द्र सिंह को सम्मानित किया गया।
तीसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन महापौर सीताराम जायसवाल ने किया कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने अपने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

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