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*इंदौर मनाएगा दो दीनी "राहत फेस्टिवल"*

*मध्य प्रदेश*
 *इंदौर*

11 अगस्त 2021 को सिर्फ राहत इंदौरी साहब की पहली बरसी ही नही थी बल्कि अदब के मंच के वीराने को भी एक साल हो चुका, बल्कि जदीद शायरी की तंगदस्ती को भी एक साल हो चुका, बल्कि अजब अंदाज़े बयां को सुस्त हुए भी एक साल हो चुका, बल्कि वो लफ्ज़ जो सिर्फ राहत साहब के अशआर का हिस्सा रहे अपने आंसू सूखा चुके।

जितना लिखूं उतना कम है। पिछले साल अदब ने सिर्फ राहत ही नही खोया बल्कि बहुत कुछ खोया है जिसका अहसास हर बढ़ते साल शायरी के दीवानो को शिद्दत से महसूस होगा क्योंकि फिलहाल तो कोई भी उस फन तक पहुंचता नही दिख रहा।

खैर राहत साहब की पहली बरसी पर प्रेम बंधन गार्डन में एक जलसा *शाम-ए-कलंदर* नाम से मुनअक़िद किया गया जिसमें शहर के तमाम सुखनवाज़ मौजूद थे। तय पाया कि हर साल राहत साहब की सालगिरह पर एक ऐसा उत्सव, एक ऐसा जश्न मनाया जाए जो उनके कद के मुक़ाबिल हो और उसको नाम दिया गया *राहत फेस्टिवल*।

इस फेस्टिवल में वो सब कुछ होगा जिसके मुंतज़िर शहर की उत्सव प्रेमी अवाम अरसे से है। इस फेस्टिवल में *युथ मुशायरा, वीमेन मुशायरा, बैतबाज़ी, किस्सागोई, डिबेट, टॉक शो, पेंटिंग एंड कैलीग्राफी एक्सहिबिशन, सूफी कॉन्सर्ट और ग्रैंड मुशायरा विथ कवि सम्मेलन* शामिल है।

ये फेस्टिवल दो दिनों तक चलेगा जिसमे साहित्य, कला, मौसिकी, बाते, शायरी और क़दीम अदबी रिवायतों का बुफे सजेगा जो शहर की अदबी भूख को सेराब करने के लिए काफी है।

साथ ही इस फेस्टिवल में *राहत-ए-अदब* और *निशान-ए-राहत* जैसे अदबी खिताब भी हक़दारों को दिये जाएगे जिसमे एक लाख रु नगद भी शामिल है जो राहत साहब फाउंडेशन अपनी जानिब से देगा।

कुल मिलाकर 1 और 2 जनवरी 2022 शहर के लिए अदबी गुलदस्ता लेकर आ रहा है जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार है और होना भी चाहिए। आखिर जिस शख्स ने अपने तखल्लुस में ही शहर का नाम जोड़ लिया हो और उस नाम को पूरी दुनिया मे बुलंद कर दिया हो तब उस शहर की भी तो कुछ ज़िम्मेदारी बनती है ना और वैसे भी अपना शहर इंदौर अपने कलाकारों को उनका हक़ देना बहुत अच्छे से जानता है।

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