*नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरत मुनि की जयंती पर भागीरथी सांस्कृतिक मंच की 747 वी काव्य गोष्ठी सिनेमा स्कूल,शाही मार्केट में संपन्न हुई।*
*सब एडिटर चीफ-बी.पी.मिश्र*
गोरखपुर ।कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. बहार गोरखपुरी ने व संचालन सत्यनारायण 'पथिक' ने किया।कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सुश्री प्रतिज्ञा सिंह की वाणी वंदना से हुआ।वरिष्ठ कवि रामसमुझ सांवरा ने गीत पढ़ा -आवत लेन उधार जब, बोलत मुख मुस्कान ।देत समय छाती फटे, काढ़े टेढ़ जुबान।कवि कुन्दन वर्मा 'पूरब' ने दोहे से मित्रता को यूं परखा-यह जुबान की कोठरी, द्वेष प्रेम की खान।बने मित्र मृदु बोल से समझो बात सुजान।वरिष्ठ कवि नंद कुमार त्रिपाठी ने श्रीराम के जीवन का आदर्श इस प्रकार बताया -हे!राम तुम्हारा यह जीवन, मानवता का अनमोल रतन।मानव इससे सुख पायेगा , वह जीवन धन्य बनाएगा।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर डा. बहार गोरखपुरी ने गजलों की बात यूं की --फूल ग़ज़लों की शाखों पे आते नहीं।आ गये भी तो वह मुस्कुराते नहीं।अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किये उनमें सुश्री प्रतिज्ञा सिंह व सर्वश्री निर्मल कुमार गुप्त 'निर्मल' , डॉ .जय प्रकाश नायक , कुमार अभिनीत , राम सुधार सिंह सैंथवार, चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा अकिंचन, सत्यनारायण 'पथिक', डॉ.अविनाश पति त्रिपाठी आदि।
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