श्री योगी अदित्यनाथ जी
गुरू श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय
गोरखनाथ मन्दिर परिसर
गोरखनाथ गोरखपुर
परम् आदरणीय, नित्य वंदनीय पूज्य श्री महाराज जी
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे।।
अर्थात्
यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला ही है क्योंकि यह अजन्मा नित्य सनातन और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता।
इस पीड़ादायक समाचार मिलने के पश्चात् गुरू श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय मे एक शोक सभा का आयोजन किया गया जिसमे चिकित्सालय के अधिकारीगण, परामर्श चिकित्सकगण, आवासीय चिकित्सकगण पैरामेडिकल के सभी सहयोगीगण नर्सेज तथा अन्य सभी कर्मचारीगण उपस्थित थे।
आपके आध्यात्मिक अवतरण से पूर्वाश्रम के जीवन के जनिता उत्तराखण्ड के यमकेश्वर स्थान पर स्थित पंचुर ग्राम के निवासी परम श्रद्धेय श्री आनंद सिंह बिष्ट जी के श्री शिव चरण में प्रयाण कर जाने का अत्यंत दुःखद समाचार हम सभी को प्राप्त हुआ। हम सभी चिकित्सालय परिवार के लोग शोक संतप्त हैं।
आप तो आध्यात्मिक जगत की विलक्षण उर्जा से युक्त अधिमान्य पुरुष हैं पर साथ ही हम सभी के व्यापक परिवार के अभिभावक और मार्गदर्शक भी हैं। इस नाते एक सहज पारिवारिक संचेतना के सूत्र से बँधे इस अपूरणीय क्षति से स्वयं को संयुक्त करते हुए हम सभी व्यथित महसूस कर रहे हैं।
आप जैसे असाधारण आध्यात्मिक चेतना से अलंकृत विलक्षण कर्मयोगी के लौकिक जीवन के पिता कहलाने का अधिकार पा कर तो उनका जीवन स्वयं ही सार्थक सिद्ध हो गया पर आपके रूप में माँ भारती की अहर्निश सेवा में समर्पित और सनातन संस्कृति की अक्षुण्णता के प्रति एकनिष्ठ व्यक्तित्व को एक प्रेरणासूत्र की भाँति हम देशवासियों पर न्योछावर कर नाथ पंत को सुयोग्य अधिकारी देने, भारत के धर्माकाश मे चमकते नछत्र की भाँती एक सुयोग्य सिद्ध सन्यासी देने, हिन्दू समाज का नायक, भारत के समाजिक राजनीति जीवन की भारतीय संस्कति के अनुरूप पूर्नस्थापित करने वाले योद्धा तथा संसार को मानवता का प्रतिमान महापुरूष देने के लिए भी सदैव स्मरण किए जाते रहेगे वे हम सभी को अपना ऋणी बना गए।
आज के इस नाजुक दौर में अपनी अतुलनीय कर्तव्यनिष्ठा को उनके अन्तिम दर्शन की अपनी इच्छा पर वरीयता देकर आपने उन्हें एक अनुपम श्रद्धांजलि तो दी ही साथ ही हम सभी के समेत सम्पूर्ण देशवासियों को कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव को कभी न भुलाया जा सकने वाला पाठ भी पढ़ाया है।
सेवा समर्पण निष्ठा और ईमानदारी का जैसा अद्भुत संगम आप में है उसके बीज अंकुरण के हेतु बन कर निश्चय ही वे एक विचार पुंज के रूप में स्वयं को अमर कर गए हैं।
गहन पीड़ा के इन क्षणों में चिकित्सालय परिवार के हम सभी सदस्य आप पूज्य श्री महाराज जी की शोक संतप्तता से स्वयं को संयुक्त करते हुए श्रद्धेय पिता जी को विनायनवत श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं एवं भूतभावन भगवान श्री भोलेनाथ जी से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अपने चरणों में स्थान दें!
हमारा चिकित्सालय परिवार एक शोक संदेश पत्र महाराज जी के श्री चरणो मे अर्पित करता है।
ॐ शान्ति
ब्रिगे0 (डाॅ0) के0पी0बी0 सिंह - निदेशक
डाॅ0 कामेश्वर सिंह - अपर निदेशक
डाॅ0 घनश्याम सिंह - मुख्य चिकित्सा अधिकारी
डाॅ0 सी0एम0 सिन्हा - मुख्य चिकित्सा अधिक्षक
डाॅ0 अवधेश अग्रवाल - उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी
श्री योगी अदित्यनाथ जी
मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश
लोक भवन, लखनऊ।
गुरू श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय
गोरखनाथ मन्दिर परिसर
गोरखनाथ गोरखपुर
परम् आदरणीय, नित्य वंदनीय पूज्य श्री महाराज जी
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे।।
अर्थात्
यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला ही है क्योंकि यह अजन्मा नित्य सनातन और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता।
इस पीड़ादायक समाचार मिलने के पश्चात् गुरू श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय मे एक शोक सभा का आयोजन किया गया जिसमे चिकित्सालय के अधिकारीगण, परामर्श चिकित्सकगण, आवासीय चिकित्सकगण पैरामेडिकल के सभी सहयोगीगण नर्सेज तथा अन्य सभी कर्मचारीगण उपस्थित थे।
आपके आध्यात्मिक अवतरण से पूर्वाश्रम के जीवन के जनिता उत्तराखण्ड के यमकेश्वर स्थान पर स्थित पंचुर ग्राम के निवासी परम श्रद्धेय श्री आनंद सिंह बिष्ट जी के श्री शिव चरण में प्रयाण कर जाने का अत्यंत दुःखद समाचार हम सभी को प्राप्त हुआ। हम सभी चिकित्सालय परिवार के लोग शोक संतप्त हैं।
आप तो आध्यात्मिक जगत की विलक्षण उर्जा से युक्त अधिमान्य पुरुष हैं पर साथ ही हम सभी के व्यापक परिवार के अभिभावक और मार्गदर्शक भी हैं। इस नाते एक सहज पारिवारिक संचेतना के सूत्र से बँधे इस अपूरणीय क्षति से स्वयं को संयुक्त करते हुए हम सभी व्यथित महसूस कर रहे हैं।
आप जैसे असाधारण आध्यात्मिक चेतना से अलंकृत विलक्षण कर्मयोगी के लौकिक जीवन के पिता कहलाने का अधिकार पा कर तो उनका जीवन स्वयं ही सार्थक सिद्ध हो गया पर आपके रूप में माँ भारती की अहर्निश सेवा में समर्पित और सनातन संस्कृति की अक्षुण्णता के प्रति एकनिष्ठ व्यक्तित्व को एक प्रेरणासूत्र की भाँति हम देशवासियों पर न्योछावर कर नाथ पंत को सुयोग्य अधिकारी देने, भारत के धर्माकाश मे चमकते नछत्र की भाँती एक सुयोग्य सिद्ध सन्यासी देने, हिन्दू समाज का नायक, भारत के समाजिक राजनीति जीवन की भारतीय संस्कति के अनुरूप पूर्नस्थापित करने वाले योद्धा तथा संसार को मानवता का प्रतिमान महापुरूष देने के लिए भी सदैव स्मरण किए जाते रहेगे वे हम सभी को अपना ऋणी बना गए।
आज के इस नाजुक दौर में अपनी अतुलनीय कर्तव्यनिष्ठा को उनके अन्तिम दर्शन की अपनी इच्छा पर वरीयता देकर आपने उन्हें एक अनुपम श्रद्धांजलि तो दी ही साथ ही हम सभी के समेत सम्पूर्ण देशवासियों को कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव को कभी न भुलाया जा सकने वाला पाठ भी पढ़ाया है।
सेवा समर्पण निष्ठा और ईमानदारी का जैसा अद्भुत संगम आप में है उसके बीज अंकुरण के हेतु बन कर निश्चय ही वे एक विचार पुंज के रूप में स्वयं को अमर कर गए हैं।
गहन पीड़ा के इन क्षणों में चिकित्सालय परिवार के हम सभी सदस्य आप पूज्य श्री महाराज जी की शोक संतप्तता से स्वयं को संयुक्त करते हुए श्रद्धेय पिता जी को विनायनवत श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं एवं भूतभावन भगवान श्री भोलेनाथ जी से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अपने चरणों में स्थान दें!
हमारा चिकित्सालय परिवार एक शोक संदेश पत्र महाराज जी के श्री चरणो मे अर्पित करता है।
ॐ शान्ति
ब्रिगे0 (डाॅ0) के0पी0बी0 सिंह - निदेशक
डाॅ0 कामेश्वर सिंह - अपर निदेशक
डाॅ0 घनश्याम सिंह - मुख्य चिकित्सा अधिकारी
डाॅ0 सी0एम0 सिन्हा - मुख्य चिकित्सा अधिक्षक
डाॅ0 अवधेश अग्रवाल - उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी
श्री योगी अदित्यनाथ जी
मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश
लोक भवन, लखनऊ।

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