*बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ 10 से 16 दिसंबर तक मानवाधिकार सप्ताह मनाएगा ( एम.आर.एम ) सूफ़ी शाह मलंग प्रकोष्ठ: ताहिर शाह*
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा आघात पहुंचाया है. सूफी शाह मलंग प्रकोष्ठ (MRM) ने इन घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्याय की मांग की है. और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए अभियान शुरू किया है.
सूफ़ी शाह मलंग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक ताहिर शाह ने अपील की है कि यह समय है जब सूफ़ी शाह मलंग (फकीर) समाज मिलकर, डटकर विश्व को शांति और सौहार्द का संदेश दें और नफरत के खिलाफ एकजुट हों. वे धार्मिक कट्टरता के खिलाफ मोहब्बत और इंसानियत के साथ खड़े हों. उन्होंने कहा कि फकीर समाज अब किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ चुप्पी नहीं साधेगा. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले चिंताजनक हैं. “यह केवल धार्मिक मुद्दा नहीं है, यह मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों की रक्षा का मामला है. धार्मिक कट्टरपंथ और व्यर्थ विवाद न केवल बांग्लादेश अल्पसंख्यक हिन्दुओं को आहत किया हैं, बल्कि अजमेर शरीफ जैसे पवित्र धार्मिक स्थल जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक हैं. इस तरह के श्रद्धा केंद्रों पर बेवजह विवाद पैदा करना समाज की एकता और विकास में भी बाधा उत्पन्न करते हैं. इसे भी “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया. इसलिए समाज को बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना होगा. धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एकजुट समाज की शांति के प्रयास के लिए दोनों ही इस गंभीर समस्या को वैश्विक स्तर पर उजागर करना भी है. इस दौरान देशभर में प्रकोष्ठ विरोध प्रदर्शन करेगा,
अजमेर शरीफ दरगाह कमेटी पर बड़ा बयान देते हुए शाह ने कहा कि जहां ये स्थल आध्यात्मिकता, एकता, भाईचारे और शांति का संदेश देते हैं. वही कमेटी में बैठे कुछ लोग इस्लामोफोबिया से ग्रसित गज़वाहिन्द का एजेंडे पर अशांति भी फैला रहे हैं. जबकि भारतीय इस्लामिक प्रवाह में प्रत्येक दरगाह खानकाह मजार पर संरक्षक,सज्जादानसीन और गद्दीनशीन फकीर समाज के मुजावर (पुजारी) हुआ करते थे परंतु आज हिंदुस्तान की हर बड़ी दरगाहों पर विदेशी डी.एन.ए वाले स्लिपर लैंड जेहादियों का क़ब्ज़ा है. इसलिए सूफी शाह मलंग प्रकोष्ठ भारत सरकार से मांग करता है कि राजनीतिक संरक्षण में पल रहे ऐसे तथाकथित दरगाह संरक्षको की जाति प्रमाण पत्र व उनके विदेशी सम्पर्क सूत्रों की जांच कराए.
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